पर्दे की रानी

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पर्दे की रानी

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Title: पर्दे की रानी
Author: Bhutto, Chunni Premlat(Scholar); Sharma, Ramesh Kumar(Guide)
Abstract: पर्दे की रानी में स्वाभाविक मनोविज्ञान का पुट पाया जाता हैं । इस रचना में प्रेत और छाया जैसा मनोविज्ञानिक ऊहापोह नहीं हैं । इसमें प्रेत और छाया की अपेक्षा घटनाचक्र अधिक हैं , मनोवश्लेष्ण सर्वत्र स्वाभाविक और साधारणतः रोचक हैं । पर्दे की रानी की कथा हमारे सामने आत्मकथा के रूप में आती हैं । इसकी नायिका की कथा युगों से पीड़ित किसी दुःखी नारी की कथा हैं । इस उपन्यास की कथा मानव की अनेक विकृतियों पर प्रकाश ड़ालती हैं । इस उपन्यास के नायक- नायिका का प्रेम भी कामवासना पर आधारित हैं । आपके उपन्यासों में समाज - चित्रण की अपेक्षा व्यक्ति – चित्रण की अधिकता हैं । संक्षंप में हम कह सकते हैं कि जोशी जी के उपन्यास अपनी वैयतिक्ता मे भी सामाजिक उपादेयता से पूर्ण है । जोशी जी का उदार , मननशील , मानव समस्याओं का व्यापक हल ढ़ूंढ़ने वाले साहित्यकार हैं ।
URI: http://dspaces.uok.edu.in/handle/1/222
Date: 1969


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