प्रेत और छाया एक अध्ययन

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प्रेत और छाया एक अध्ययन

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Title: प्रेत और छाया एक अध्ययन
Author: Gunjoo, Kitri Kumari(Scholar); Sharma, Ramesh Kumar(Guide)
Abstract: प्रेमचन्द्र के पश्चात् हिन्दी उपन्यास को नई दिशाओं में अग्रसर करने वाले उपनयासकारों मे जोशी जी का भी एक मुख्य स्थान हैं । आपने प्रेत और छाया में अति मनोवैज्ञानिकता का परिचय दिया गय हैं जिस कारण लेखक की मनोवृति एवं सिद्धान्त बिल्कुल परिस्फुट हो उठे हैं । इस उपन्यास में लेखक ने पारसनाथ को विभिन्न परिसस्थितियों में डालकर उसके क्रिया कलापों एवं भावना ग्रंथियों में सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया हैं । प्रमुख पात्र आत्ममुखोदगीरित चारित्रिक सुख – दःख ,प्रेम और घृणा , मघुरता और कटुता जीवन में शुक्ल और कृष्ण पक्ष की भांति आया करते है । प्रेत और छाया का नायक पारसनाथ तो प्रत्येक बार पतन-मार्ग पर चलने से पूर्ण अन्तर्द्धन्द्ध में फंसा नज़र आता हैं । प्रेत और छाया में हमें जीवन की झांकी मिलती हैं कि किस तर मनुष्य कठनाईयों के कारण प्रेतों से ढ़का रहता हैं जिस प्रकार परसनाथ सर्वदा इन प्रेतों से भयभीत रहता हैं । प्रेत और छाया में नारी का विश्या रूप की समस्या पर भी पयाप्त प्रकाश पड़ा हैं । इसमें प्रेम के विकृति रूप के दर्शन हते हैं ।
URI: http://dspaces.uok.edu.in/handle/1/223
Date: 1968


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