माधव जी सिन्धिया एक अध्ययन

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माधव जी सिन्धिया एक अध्ययन

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Title: माधव जी सिन्धिया एक अध्ययन
Author: Gunjoo, Meena Jaleel(Scholar); Sharma, Ramesh Kumar(Guide)
Abstract: उपन्यास में जीवन के प्रति उचित दृष्टि , अतिस्वार्थपरता से मुक्ति , एकता , की भावना तथा सैनिक संगठन पर विशेष प्रकाश डाला गया हैं । उपन्यास में भारतीय जन मे भक्ति और शक्ति के समन्वय का अभाव हैं । ब्रज निवासी कंठी माला में मानव पुरूषार्थ की इति मान बैठे हैं । माधव जी सिन्धिया हैं कि जीवन में रहकर उसे भोग कर भी उसमें डूबना नहीं हैं , जैसे आग में यदि हाथ न डाला जाय तो उससे अधिक उपकारी पदार्थ संसार में नहीं । यही संतुलन माधव गन्ना का सोन्दर्य अक्षुण्ण हैं । वह स्वंय कहता हैं – वह चपम्तकारपूर्ण पानी का बबूला थीं , उसे मैंने नहीं बुलाया , आलोकमय ओस का कण थी जिसे मैं ने चपल दूबर्लय पर ही बना रहने दिया । उपन्यास के अंत में वर्मा जी ने माधव जी के दृवारा कहलाया हैं , अतः प्रगति जीवन का दूसरा नाम है ।
URI: http://dspaces.uok.edu.in/handle/1/228
Date: 1968


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