यशपाल तथा राँगेयराघाव की कहानियों का तुलनात्मक अध्ययन

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यशपाल तथा राँगेयराघाव की कहानियों का तुलनात्मक अध्ययन

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Title: यशपाल तथा राँगेयराघाव की कहानियों का तुलनात्मक अध्ययन
Author: Baboo, Mohan Lal(Scholar); Sharma, Ramesh Kumar(Guide)
Abstract: यशपाल तथा राँगेयराघाव दोनों ने केवल मानव का केवल एक ही दिशा में संदेश नहीं दिया हैं , अपितु राजनीति , साहित्यक , दार्शनिक सन्देश भी दिये---- दोनों ने एक मिशन को लेकर लिखा हैं । उन्होंने शिल्प की विशेषरूप से परवाह नहीं की । सहज और आवश्यक कलाकारिता के अन्तर्गत जो शिल्प आ जाती हैं , वह उसी से सन्तुष्ट रही हैं । उन्होंने कभी भी मानव – समाज के नैतिक आदर्शों का विरोध नहीं किया हैं । उन्होंने यथार्थ के साथ - साथ जीवन के विकास के मानव – चेतना के शाश्वत विकास के संकेतों का विकास पथ के संकेतों का भी उल्लेख किया हैं । दोनों कहानीकारों ने हिन्दी कहानी को नई दिशा में गति प्रदान करने में पार्प्त योग दिया हैं ।
URI: http://dspaces.uok.edu.in/handle/1/229
Date: 1968


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